Timeline
Ambikapur to Ranchi, Ranchi to Tona, and Tona to Ambikapur
वो 13 नवंबर का दिन था। मुझे रांची जाना था , एग्जाम देने के लिए। वैसे तो मैं कोई भी गवर्नमेंट जॉब के लिए अप्लाई तो नहीं करता ज ज हूँ , लेकिन इस बार घर में कहने पे कर दिया था। मेरा एग्जाम 14 नवंबर को था। इसलिए 13 नवंबर को रात में अंबिकापुर बस से सफर करके रांची पहुंचा। सुबह 4 बजे। मैं लगभग 3 साल बाद रांची आया था। ये सहर मेरे लिए नया नहीं था क्योंकि मैंने यहीं रह के 3 साल पढाई किया था।
मैं 4 बजे जब रांची के कांटाटोली पहुंचा तो थोड़ा कंफ्यूज हो गया। क्योंकि सब कुछ पहले जैसा बिलकुल नहीं था। वहीँ पे फ्लाईओवर बन रहा था। एक रोड को 2 भाग में बाँट दिया गया था। रात का टाइम था , मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैंने एक ऑटो बुक किया और सीधा पॉलिटेक्निक हॉस्टल आ गया। यहीं हॉस्टल में रह के पहले मैं पढाई करता था। सो कुछ लोग मुझे जानते थे। और मेरा यहाँ एक पुराना दोस्त रहता था। विक्की , पर हम सब उसे वायरस बुलाते थे। वायरस मेरा वेट कर रहा था , कॉलेज के गेट के सामने। मैं हॉस्टल गया और थोड़ा देर सोना चाहा , पर मुझे नींद नहीं आयी।
सुब्बह हुवा और मैं थोड़ा हॉस्टल में और भी लोगो से मिलने के लिए निकला। सब कितना मेहनत करते हैं यहाँ। सब ने खुद को डेडिकेट कर दिया हैं गवर्नमेंट जॉब के लिए। 8 बजे मैं ब्रेकफास्ट लेने गया बहार , और हॉस्टल में लाके नहाने के बाद सब के साथ ब्रेकफास्ट किया। मेरा एग्जाम 1 बजे था पर रिपोर्टिंग टाइम 11 बजे से था। रेडी होके मैं एग्जाम सेंटर पहुंचा। मेरा सेंटर बूटी मोरे के पास था। सेंटर के पास काफी भिंड लगी हुवी थी। सब कोई एग्जाम के लिए आये हुवे थे।
रिपोर्टिंग सुरु हुवी , मैं एग्जाम हॉल में गया। अटेंडेंस हुवा और फिर एग्जाम भी। 2:30 में एग्जाम हॉल से बहार आया। बहुत भूख लग चुकी थी। मैंने खाने में बहुत सारा सामान लिया और सीधा हॉस्टल पहुंचा। 3 - 4 दोस्त मिलके पार्टी किया। शाम में रांची में मैन रोड घूमने गया। बहुत यादें जुडी हैं मरी इस सहर से। वो स्टूडेंट लाइफ , वो स्ट्रगल वाले दिन। आज नाईट में मैं हॉस्टल में ही रुका।
दूसरे दिन मेरा दोस्त वायरस के साथ टैगोर हिल , मोराबादी और रॉक गार्डन घूमने गया। आज 15 नवंबर था। आज पूरा घूम के थक चूका था। सो आज भी मैं हॉस्टल में ही रुक गया। 16 नवंबर को सुब्बह उठा और रांची से टोना आ गया।
टोना , हाँ मेरा बचपन का गाँव। काफी आरसे के बाद मैं यहाँ जाने वाला था। लगभग 5 सालों के बाद। मेरा बचपन बिता हैं यहाँ। 10 वी तक यहीं रह के पढाई किया था। मैं टोना 16 नवंबर को शाम में 6 बजे पहुंचा। बहुत लोग तो मुझे पहचान भी नहीं पा रहे थे। इतने दिनों के बाद जो गया था। मैंने जाते के साथ पहले नहाया। क्योंको जो बस से आया था वो पूरा कचरा था। नहाने के बाद मैं सभी पुराने दोस्तों से मिला।
डिनर का 2 ऑप्शन था , चाचा यहां या फिर खाला यहाँ। मैं दोनों यहाँ डिनर किया। ऐसा ऑप्शन खाने का कहाँ मैं छोड़ने वाला था। अगले दिन 17 नवंबर को नानी से यहाँ गया। पचपड़वा मेरा नानी का घर है। मेरी नानी अभी अलाइव है। उससे मिले भी 4 साल हो गए थे। इसलिए वहां भी गया , सिर्फ 1 ऑवर के लिए। पूरा टोना घुमा और 20 नवंबर को वापस अंबिकापुर आ गया।